Thursday, 5 September 2024

तुम आऒ एक बार

 फिर होली आ गयी है।

दीवानगी छा गयी है।
सोए अरमान फिर जगे हैं,
सपने सजने से लगे हैं।
फिर तुम्हारा इंतजार है।
दिल बेकरार सा है,चेहरे पर
लगाने की जगह रंग,बालों में
भर जाए।
काश तुम आओ,
फिर दोहराओ कि
 चेहरे पर नहीं,
इन से बालों को रंगना है।
रंग चेहरे को  प्यार करने लायक
नहीं छोड़ेंगे।
बाल तो काले हैं।
इनका क्या बिगड़ता है?
काश ,ये चांदी से होते।
फिर रंग खूब जमता।
तुम कहतीं थीं और 
कहकर खिलखिलाती थीं।
आज ये चांदी से ही हैं।
काश तुम होली पर
भूली- भटकी चली आऒ।
मेरे बालों को अलग −अलग 
रंगों से सराबोर कर दो।
रंग दो इन्हें ईस्टमैन कलर में।
काश ! ऐसा हो जाए ।
तुम्हारी 
खिलखिलाहट फिर सुनाई दे जाए।
कह दो कि बाल आज रंगीन हो गए हैं।
होली में हम रंग गए हैं।
तुम आऒ एक बार।
बहुत है इंतजार।

No comments:

Post a Comment