जय बाबा बजरंगी जी !
करदो दुनिया चंगी जी।
बड़े लोगों की दिल्ली ये,
और बड़ी रजधानी जी
इसमें सांसे लेने को,
शुद्ध हवा की तंगी जी।
किससे मन की बात कहें?
किसके संग बैठें, खाएं?
धीरे- धीरे छूट रहे हैं,
अपने साथी -संगी जी।
जाने कैसे खेल कराए?
जाने कैसे नाच नचाये?
राजनीति से बचना तुम,
ये है पूरी नंगी जी।
-अशोक मधुप
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