Thursday, 5 September 2024

कितना कुछ है बदला



देखो कितना  कुछ है बदला,
जवानी बदली ,
बचपन बदला।
तुम न बदले
मैं ना बदला।
यह तो बिल्कुल
साफ- सही है।
दिल में है यादों का डेरा।
तुम कहते हो
मंजिल पा ली ,
हमने पूछा कब हुआ सवेरा ?
रात घनेरी ,चंदा उजला।
दुनिया सुख-दुख का मेला ।
दर्द ,गमों को,
भूल गया है।
हमसे तो 
अच्छा है पगला।
जीवन की डगर होती अनजानी!
राह चलता , राही भूला ।
पर कभी कोई अनजाना ,
संबल बन आ जाता है, 
आशा की किरण जगा जाता है ।

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