जय जय राम रमैया जी,
यूपी वाले भैया जी !
शहर-शहर गौशाला जब,
सड़कों पर क्यों गैया जी।
अधिकारी तो सुनते ना,
सूखे ताल- तलैया जी।
अब प्रधान ही लूट रहे,
जमकर माल मलैया जी।
ये कलजुग है होगा सब,
तू क्यो रोवे भैया जी ?
सारे चौकीदार यहाँ ,
फिर क्यों डूबी नैया जी ?
देख जमाने की लिप्सा,
रोवे नोट रुपैया जी।
सब मस्ती में मस्त हुए,
सबकी ताता थैया जी।
मैं भी लूटूं, तू भी लूट,
मत चिंता कर भैया जी।
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