Thursday, 5 September 2024

बैठ जाओ

 

मैं सोने जा रहा हूँ 

आऒ सिरहाने बैठ जाओ। 

मैं जब बेचैन हूँ,

कुछ गुनगुनाने बैठ जाओ।

 कभी तन्हाई डसती है,

अकेलापन भी खलता है

रहो खामोश मत

सुनने -सुनाने बैठ जाओ।

 हवा बहकी हुई सी हो,

हो मौसम भी आवारा

इन शरारती ऑखों से,

पिलाने को बैठ जाओ। 

तुम्हारी रेशमी जुल्फ़ें तो ,

सावन की घटाएं है ,

जुल्फ़ों को मेरे मुख पर

बिखराने को बैठ जाओ ।

अशोक मधुप

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