मत बोलो मौन रहो।
आज ऐसे ही बात करने का मन है।
ऐसे ही सुनने का मन है।
ऐसे ही सुनाने का मन है।
नजरें मिलाने का मन है।
नजरें झुकाने का मन है।
मौन रहकर तुम्हें सुनने का मन है।
मौन रहकर तुम्हें सुनाने का मन है।
अजीब कशमकश में हूॅ ,
मीठी सी उलझन में हूॅ ।
मन कहता कुछ है
और चाहता कुछ और है ।
मन से मन की बात है ,
और यह स॔वाद ही पर्याप्त है ।
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