Thursday, 5 September 2024

तुमसे लड़ने का मन है

 

तुमसे लड़ने का मन है,

पर बिन तुम भी नहीं जीवन है।

 दूर बैठ कर तो लड़ना असंभव है ।

 क्या ऐसा नही हो सकता

कि तुम और मैं बैठें 

सामने लड़ने के लिए।

 लड़ाई तो हो कहने के लिए ।

 मौन रहकर संवाद करें।

 एक दूसरे की ऑखों में देखें,

खामोश बैठे और लड़ें। तुम बहुत लड़ती हो

चलो एक दिन चुप बैठकर भी

 लड़कर दिखाओ। पास बैठो

मुझे गुस्से में घूरो, दाॅत किचकिचाओ। 

उसके बाद ऑख मारो

धीरे से मुस्कराओ। 

अशोक मधुप

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