: मॉल रहे या माले जी।
रुके नहीं घोटाले जी।
गंगा
ही बस पावन है,
दूषित
नदियाँ, नाले जी।
उनके
घर पकवान बने हैं,
इनके
रोटी- लाले जी।
कुछ
गलती तो थी अपनी,
क्यों
ये विषधर पाले जी?
नेता
जी के दमपर ही
खुश
हैं साली - साले जी।
योगी
मोदी अच्छे हैं,
अधिकारी
मतवाले जी।
नए
-नए हथकंडों से ,
करते
काम निराले जी।
फाइल
पैसे से चलती,
कैसे
काम निकालें जी।
आओ
बैठो सोचें कुछ,
बिगड़ी
बात बनालें जी।
क्या लाये या ले जाएंगे ?
मन को ये समझालें जी,
बुरा
समय आया था कल ,
भाग
गये हमप्याले जी।
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