मेरे एक मित्र बहुत बढिया
फोटोग्राफर हैं।
आजकल वे आगरा में तैनात हैं।
आज फेस बुक पर उन्होंने
ताजमहल का फोटो पोस्ट किया है।
बहुत शानदार फोटो है, संध्या काल का।
आसमान लाल हो रहा है
सूर्य की लालिमा
ताज महल को स्वर्णिम कर रही है।
मित्र ताजमहल के कईं शानदार फोटो
खींच चुके हैं।
मेरे फोटोग्राफी के शौक से वे परिचित हैं।
कईं बार ताज देखने
ताज के फोटो खींचने के लिए
आमंत्रित कर चुके हैं।
पर मैं नहीं गया।
सदा टालता रहा।
तुम्हारे से किया वायदा
तो नही तोड़ सकता था।
काँलेज का टूर आगरा
जाने वाला था।
तुम और मैं भी जाना
चाहते थे।
दोनों की जाने और ताज को साथ
देखने की तमन्ना थी।
पर तुम्हारे परिवार ने
तुम्हे अनुमति नहीं दी थी।
तुम्हें न जाते देख
मैने भी अपना
कार्यक्रम कैंसिल कर दिया था।
तै हुआ था कि ताजमहल देखने
साथ जाएंगे।
ताजमहल के सामने बनी बैंच पर
जहां बैठकर सभी जोडें फोटो खिथचातें हैं
वहीं बैठकर फोटो खिचांएगे।
इस प्रेम की निशानी को साथ
देखेंगे, साथ निहारेंगे।
तुम्हारे −मेरे कभी साथ
जाने का अवसर नही मिला,
काँलेज के समय की बिछड़ी तुम ¬¬
कभी मिली नहीं।
मैं अकेले गया नहीं।
आगरा ही नहीं
प्रेम के सभी यादगार स्थल
घूमने का कभी मन नही हुआ।
न बरसाने गया, न मथुरा
न वृंदावन।
वह सभी जगह नहीं गया
जहां तुम़्हारे साथ जाने का मन था
या जहां जाकर तुम्हारी याद आ जाती।
पूरा जीवन ऐसे ही गुजर गया।
कान्हा और राधा की तरह अकेले
एकाकी।
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