Thursday, 5 September 2024

 शब्दों की देह को साकार कर गये,

 आखर उतरके चमत्कार कर गये।

 दुश्मन भी कभी जो कर नहीं सके

वो पूरा काम अपने यार कर गए।

अशोंक मधुप

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