तारों से दुश्मनी सी लगती है।
चांदनी में कमी सी लगती है।
महफ़िल में सभी दोस्त आए हैं,
बस उसकी कमी सी लगती है।
कोई हंस रहा है जोर जोर से,
आंखों में कुछ नमी सी लगती है।
भोर का तारा भी निकल आया,
आस फिर भी बनी सी लगती है।
मेरे इशारे पर भी मौन दुश्मन है,
बर्फ ज्यादा जमी सी लगती है।
No comments:
Post a Comment